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माननीय मंत्री

श्री धर्मेंद्र प्रधान

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा इस्पात मंत्रालय


श्री धर्मेन्‍द्र प्रधान भारत सरकार में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा इस्‍पात के कैबिनेट मंत्री हैं। श्री प्रधान स्‍वतंत्र भारत के इतिहास में पहले ऐसे मंत्री हैं जिन्‍होंने दिनांक 31 मई, 2019 को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया। श्री प्रधान जी को दिनांक 03 सितंबर, 2017 को कैबिनेट मंत्री के रूप में पदोन्‍नत किया गया था। संसद सदस्‍य के रूप में श्री प्रधान, वर्तमान में, राज्‍य सभा में मध्‍य प्रदेश का प्रतिनिधित्‍व करते हैं और इससे पहले वे 14वीं लोक सभा के सदस्‍य थे। 26 जून, 1969 को जन्‍मे श्री प्रधान ओडिशा में तालचेर शहर से हैं।

भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री के रूप में श्री प्रधान जी ने पिछले 5 वर्षों में अनेक सुधारवादी उपायों और पहलों को कार्यान्वित किया है जिनमें विश्‍व की सबसे बड़ी प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण योजना ‘पहल’ शामिल है। साथ ही, #गिव-इट-अप अभियान को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी का भरपूर समर्थन प्राप्‍त हुआ जिसका उद्देश्‍य संपन्‍न नागरिकों को अपनी एलपीजी राजसहायता जरूरतमंद लोगों के लिए छोड़ने के लिए प्रोत्‍साहित करना है। योजना को 10 मिलियन से ज्‍यादा उपभोक्‍ताओं से शानदार समर्थन मिला। ग्रामीण भारत को तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) जैसे स्‍वच्‍छ ईंधन उपलब्‍ध करवा कर मजबूत बनाने की कोशिश में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा प्रधान मंत्री उज्‍ज्‍वला योजना शुरू की गई थी जिसके तहत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) रह रहे परिवारों की महिलाओं को 8 करोड़ एलपीजी कनेक्‍शन प्रदान किए गए हैं।

श्री प्रधान ने हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में कुछ महत्‍वपूर्ण फैसले किए हैं जो उद्योग के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रधान जी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के समर्थन से एक नई हाइड्रोकार्बन अन्‍वेषण और लाइसेंसिंग नीति लागू की है जिसमें सभी प्रकार के हाइड्रोकार्बनों के अन्‍वेषण और उत्‍पादन हेतु एकीकृत लाइसेंसिंग, खुला रकबा नीति तथा स्‍वतंत्र विपणन और मूल्‍य निर्धारण जैसी व्‍यवस्थाओं से भारत में तेल और गैस का घरेलू उत्‍पादन बढ़ेगा तथा इस क्षेत्र में पर्याप्‍त निवेश होगा और साथ ही पर्याप्‍त रोजगार का सृजन होगा।

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्री के रूप में श्री प्रधान ने अपने पिछले कार्यकाल (2017-19) में भारतीय युवाओं में कौशल के अभाव को दूर करने के लिए कई कदम उठाए। उन्‍होंने कुशल कार्मिकों को पुन: प्रशिक्षण देने (री-स्किलिंग) और पहले से कुशल युवाओं को उच्‍च दर्जे का प्रशिक्षण देने (अप-स्किलिंग) जैसे कई कार्यक्रम शुरू किए।

भुवनेश्‍वर में उत्‍कल विश्‍वविद्यालय से मानव शास्‍त्र में स्‍नातकोत्‍तर श्री प्रधान युवाओं से जुड़े अनेक मुद्दों के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं जिनमें बेरोजगारी, कौशलपरक शिक्षा के अभाव, किसानों के पुनर्वास आदि से संबंधित विषय शामिल हैं। उन्‍होंने ओडिशा में युवाओं को इस दिशा में प्रेरित करने में एक बड़ी भूमिका निभाई है।

प्रधान जी ने वर्ष 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) कार्यकर्ता के रूप में काम शुरू किया था और उन्‍होंने सचिव के रूप में एबीवीपी की सेवा की है। उन्‍होंने बिहार में चुनाव प्रभारी के रूप में और कर्नाटक, उत्‍तराखंड, झारखंड और ओडिशा में पार्टी मामलों के प्रभारी के रूप में भी काम किया है।

समाज और पार्टी के लिए उनके योगदान को देखते हुए श्री प्रधान जी को “सर्वश्रेष्‍ठ विधायक पुरस्‍कार”, उत्‍कलमणि गोपाबंधु प्रतिभा सम्‍मान, 2002-03 और 2013 में ओडिशा नागरिक पुरस्‍कार प्रदान किए गए थे।

उनकी धर्मपत्‍नी श्रीमती मृदुला प्रधान हैं और उनके दो बच्‍चे निशांत और नैमिशा हैं।