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राजसहायता कार्यक्रमों का निष्‍पादन

सरकार द्वारा पेट्रोलियम क्षेत्र में प्रशासित मूल्‍य-निर्धारण प्रणाली (एपीएम) का विखंडन 1 अप्रैल, 2002 से घोषित किया गया था। एपीएम अवधि के दौरान पीडीएस केरोसिन और घरेलू एलपीजी पर राजसहायता तथा दूर-दराज के क्षेत्रों के लिए भाड़ा राजसहायता को ऑयल पूल खाता प्रणाली के जरिए पूरा किया गया था। एपीएम को समाप्‍त करते समय सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया था कि तेल कंपनियों को उपर्युक्‍त राजसहायता/अल्‍प वसूलियों को सरकारी बजट से पूरा किया जाएगा।

तदनुसार, निम्‍नलिखित योजनाओं को इस दृष्‍टि से अधिसूचित किया गया था ताकि तेल कंपनियों को सरकारी बजट से दूर-दराज के क्षेत्रों के लिए पीडीएस केरोसिन और घरेलू एलपीजी तथा भाड़ा राजस्‍हायता पर एपीएम के बाद एक राजसहायता प्रणाली उपलब्‍ध कराई जाए:

  1. पीडीएस केरासिन और घरेलू एलपीजी राजसहायता योजना, 2002 (दिनांक 28.1.2002 के सरकारी राजपत्र सं.20029/18/2001-पीपी में अधिसूचित)।
  2. भाड़ा राजसहायता (दूर-दराज के क्षेत्रों के लिए) योजना, 2002 (दिनांक 28.1.2002 के सरकारी राजपत्र सं.20029/18/2001-पीपी में अधिसूचित)।

"केरोसिन और घरेलू एलपीजी राजसहायता योजना 2002" के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसीज) को प्रति बिक्री यूनिट राजसहायता की फ्लैट दर दी जाएगी जो 31.3.2002 को लागत मूल्‍य और प्रति बिक्री इकाई निर्गम मूल्‍य के बीच के अंतर के बराबर हो। ओएमसीज को अतर्राष्‍ट्रीय मूल्‍यों के अनुसार इन उत्‍पादों के खुदरा बिक्री मूल्‍यों (आरएसपी) का समायोजन करना था। तथापि, सरकारी निर्देशों का सम्‍मान करते हुए पीडीएस केरोसिन के मूल्‍य में मार्च 2002 से कोई परिवर्तन नहीं किया गया है जबकि एलपीजी के मामले में केवल मामूली वृद्धि की गई है। इस प्रकार, वर्तमान में तेल पीएसयू सरकारी राजसहायता के अलावा एलपीजी और पीडीएस केरोसिन के राजसहायता के बोझ को भी वहन कर रही हैं।

पीडीएस केरोसिन और घरेलू एलपीजी राजसहायता योजना, 2002.

पीडीएस केरोसिन और घरेलू एलपीजीपर एपीएम के बाद (प्रशासित मूल्य-निर्धारण प्रणाली) राजसहायता को प्रशासित करने के लिए, दिनांक 01.04.2002 से सरकार पीडीएस केरोसिन और घरेलू एलपीजी पर राजसहायता को अनुमोदित किया था।

योजना के अंतर्गत राजसहायता सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस केरोसिन) और घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी सिलेंडरों (घरेलू एलपीजी) की भागीदारी कंपनियों द्वारा की गई बिक्री पर उपलब्‍ध कराई जाती है। पीडीएस केरोसिन की मात्रा, जिन पर प्रत्‍येक राज्‍य को राजसहायता प्रदान की जाती है, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किए गए आबंटन तक सीमित होती है जो वास्‍तविक बेची गई मात्रा के अधीन होती है।

वर्तमान में इंडियन आूयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), हिन्‍दुस्‍तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) तथा आईबीपी कंपनी लिमिटेड (आईबीपी) को योजना में भाग लेने की अनुमति दी गई है।

राजसहायता की राशि का निर्धारण

पीडीएस केरोसिन और घरेलू एलपीजी पर राजसहायता को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बजट अनुदान से पूरा किया जाता है।

प्रति बिक्री इकाई राजसहायता की राशि, प्रति बिक्री इकाई लागत मूल्‍य और निर्गम मूल्‍य के बीच के अंतर के बराबर होती है और घरेलू एलपीजी के लिए इसकी गणना पीडीएस केरोसिन के पूर्व-डिपो मूल्‍य और पूर्व-बॉटलिंग संयंत्र से की जाती है। वर्ष 2002-03 के लिए किसी डिपो/बॉटलिंग संयंत्र की प्रति बिक्री इकाई की राशि उत्‍पाद के निर्गम मूल्‍य की राजसहायता राशि तथा 01.04.2002 को लागत मूल्‍य पर आधारित थी। किसी डिपो/बॉटलिंग संयंत्र के लिए दी गई प्रति बिक्री इकाई राजसहायता में वित्‍तीय वर्ष 2002-03 से कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा वित्‍त मंत्रालय के बीच परामर्श के बाद सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार राजसहायता को 3-5 वर्षों में चरणबद्ध ढंग से हटाया जाएगा। सरकार ने आगे यह निर्णय लिया है कि वर्ष 2004-05 से 2006-07 तक राजसहायता का वर्ष 2002-03 के लिए लागू दरों के एक-तिहाई स्‍तर पर भुगतान किया जाना चाहिए।

निर्गम मूल्‍य

डिपो/बॉटलिंग संयंत्रों, जहां से पीडीएस केरोसिन और घरेलू एलपीजी की बिक्री योजना के शुरू होने से पूर्व प्रभावित हो रही थी, के लिए 31 मार्च 2002 को उत्‍पाद का निर्गम मूल्‍य 1 अप्रैल 2002 के बाद भी जारी रहा। इस उद्देश्‍य के लिए निर्गम मूल्‍य का आशय पूर्व-डिपो/बॉटलिंग संयंत्र के बीजक मूल्‍य से है जिसमें राज्‍य अधिशुल्‍क, उत्‍पाद शुल्‍क, बिक्री कर, स्‍थानीय शुल्‍क और सुपुर्दगी प्रभार शामिल नहीं है।

लागत मूल्‍य

किसी डिपो के लिए पीडीएस केरोसिन का लागत मूल्‍य और किसी बॉटलिंग संयंत्र के लिए घरेलू एलपीजी सिलेंडर की गणना मार्च 2002 के दौरान विद्यमान अंतर्राष्‍ट्रीय मूल्‍यों को ध्‍यान में रखते हुए आयात सममूल्‍य आधार पर की जाती है।

राजसहायता का प्रभाव

घरेलू एलपीजी और पीडीएस केरोसिन पर प्रति बिक्री इकाई औसत राजसहायता निम्‍नानुसार बनती है:-

वर्ष   घरेलू एलपीजी पीडीएस एसकेओ
    रुपए/सिलेंडर रुपए/लीटर
2002-03   67.75 2.45
2003-04 दो-तिहाई स्‍तर पर 45.17 1.63
2004-05 एक-तिहाई स्‍तर पर 22.58 0.82

पीडीएस केरोसिन और घरेलू एलपीजी राजसहायता योजना, 2002 के अंतर्गत राजसहायता दावों के भुगतान हेतु बजट प्रावधान तथा केन्‍द्रीय बजट से जारी वास्‍तविक भुगतान निम्‍न प्रकार है:

    (रुपए करोड़ में)
वर्ष बजट आबंटन वर्ष के दौरान जारी वास्‍तविक भुगतान
2002-03 4,495.80 4,495.80
2003-04 6,292.44 6,292.44
2004-05 3,500.00 2,930.31

2. भाड़ा राजसहायता (दूर-दराज के क्षेत्रों के लिए) योजना 2002

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस केरोसिन) के अंतर्गत दूर-दराज के क्षेत्रों में उत्‍पादों की आपूर्ति और बिक्री के लिए भाड़ा राजसहायता केरोसिन के लिए तथा घरेलू गैस हेतु (घरेलू एलपीजी) तरलीकृत पेट्रोलियम गैस के लिए उपलब्‍ध कराई जाती है। पीडीएस केरासिन, जिस पर प्रत्‍येक राज्‍य को राजसहायता उपलब्‍ध कराई जाती है, की मात्रा वास्‍तव में बेची गई मात्रा के अधीन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किए गए आबंटन तक सीमित होती है।

इस योजना के लिए निम्‍नलिखित क्षेत्रों को "दूर-दराज के क्षेत्रों" में शामिल किया गया है:

  • सिक्‍किम सहित पूर्वोत्‍तर राज्‍य, केवल उन जिलों को छोड़कर जहां डिगबोई, गुवाहाटी, बोंगईगांव और नुमालीगढ़ रिफाइनरियां स्‍थित हैं।
  • जम्‍मू और काठवा के जिलों को छोड़कर जम्‍मू व कश्‍मीर राज्‍य, हिमाचल प्रदेश, उत्‍तरांचल, जिसमें हरिद्वार और उद्यम सिंह नगर शामिल नहीं हैं।
  • अंडमान व निकोबार द्वीप समूह; और
  • लक्षद्वीप समूह

वर्तमान में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), हिन्‍दुस्‍तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) तथा आईबीपी कंपनी लिमिटेड (आईबीपी) को योजना में भाग लेने की अनुमति दी गई है।

पीडीएस केरोसिन और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर आपूर्तियों पर भाड़ा राजसहायता में पीडीएस केरोसिन के मामले में थोक बिक्री डीलर स्‍थल और एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूटर स्‍थल शामिल हैं, जिसमें घरेलू एलपीजी के मामले में विस्‍तार काउंटर भी सम्‍मिलित हैं।

1 अप्रैल 2002 से योजना के अंतर्गत राजसहायता की पात्रता, दूरी के लिए परिवहन लागत के संबंध में 31 मार्च 2002 को पात्र क्षेत्रों में उपलब्‍ध भाड़ा राजसहायता तक सीमित है:

पूर्वोत्‍तर के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में बॉटलिंग संयंत्र/डिपो से एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूटर/विस्‍तार काउंटर/थोक डीलर तक।

अन्‍य दूर-दराज के क्षेत्रों के लिए बॉटलिंग संयंत्र/डिपो के निकटतम टैप ऑफ बिंदु या रेलशीर्ष तक और दूर-दराज के क्षेत्रों में आगे एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूटर/विस्‍तार काउंटर/थोक बिक्री डीलर तक।

पेट्रोलियम आयोजना और विश्‍लेषण प्रकोष्‍ठ (पीपीएसी) तेल कंपनियों के राजसहायता दावों की जांच करता है और उन्‍हें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को अनुमोदन और भुगतान जारी करने के लिए भेजता है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा वित्‍त मंत्रालय के बीच परामर्श के बाद सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार राजसहायता को 3-5 वर्षों में चरणबद्ध ढंग से हटाया जाएगा। सरकार ने आगे यह निर्णय लिया है कि वर्ष 2004-05 से 2006-07 तक राजसहायता का वर्ष 2002-03 के लिए लागू दरों के एक-तिहाई स्‍तर पर भुगतान किया जाना चाहिए।

भाड़ा राजसहायता (दूर-दराज के क्षेत्रोंके लिए) योजना, 2002 के अंतर्गत राजसहायता दावों के भुगतान हेतु बजट प्रावधान तथा केन्‍द्रीय बजट से जारी वास्‍तविक भुगतान निम्‍न प्रकार है:

    (रुपए करोड़ में)
वर्ष बजट आबंटन वर्ष के दौरान जारी वास्‍तविक भुगतान
2002-03 239.14 62.35
2003-04 79.32 58.74
2004-05 53.00 26.07